सीधे कंटेंट पर जाएँ
सहीह मुस्लिम

नंबर 3390

नंबर 3390किताब 15, नंबर 594अरबी नंबरिंग 1399.02
وَحَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ نُمَيْرٍ، وَأَبُو أُسَامَةَ عَنْ عُبَيْدِ، اللَّهِ ح وَحَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ نُمَيْرٍ، حَدَّثَنَا أَبِي، حَدَّثَنَا عُبَيْدُ اللَّهِ، عَنْ نَافِعٍ، عَنِ ابْنِ، عُمَرَ قَالَ كَانَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم يَأْتِي مَسْجِدَ قُبَاءٍ رَاكِبًا وَمَاشِيًا فَيُصَلِّي فِيهِ رَكْعَتَيْنِ ‏.‏ قَالَ أَبُو بَكْرٍ فِي رِوَايَتِهِ قَالَ ابْنُ نُمَيْرٍ فَيُصَلِّي فِيهِ رَكْعَتَيْنِ ‏
Ibn Umar (Allah be pleased with them) reported that Allah's Messenger (ﷺ) came to the mosque at Quba' riding and on foot, and he observed two rak'ahs of (Nafl prayer) in it

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 15 · The Book of Pilgrimage

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।