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सहीह मुस्लिम

नंबर 3369

नंबर 3369किताब 15, नंबर 573अरबी नंबरिंग 1390.02
وَحَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ يَحْيَى، أَخْبَرَنَا عَبْدُ الْعَزِيزِ بْنُ مُحَمَّدٍ الْمَدَنِيُّ، عَنْ يَزِيدَ بْنِ الْهَادِ، عَنْ أَبِي بَكْرٍ، عَنْ عَبَّادِ بْنِ تَمِيمٍ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ زَيْدٍ الأَنْصَارِيِّ، أَنَّهُ سَمِعَ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم يَقُولُ ‏ "‏ مَا بَيْنَ مِنْبَرِي وَبَيْتِي رَوْضَةٌ مِنْ رِيَاضِ الْجَنَّةِ ‏"‏ ‏.‏
Abdullah b. Zaid al-Ansari heard Allah's Messenger (ﷺ) as saying:That which exists between my pulpit and my house is a garden from the gardens of Paradise

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 15 · The Book of Pilgrimage

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।