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सहीह मुस्लिम

नंबर 3347

नंबर 3347किताब 15, नंबर 551अरबी नंबरिंग 1378.01
وَحَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ أَيُّوبَ، وَقُتَيْبَةُ، وَابْنُ، حُجْرٍ جَمِيعًا عَنْ إِسْمَاعِيلَ بْنِ جَعْفَرٍ، عَنِ الْعَلاَءِ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ، عَنْ أَبِيهِ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ لاَ يَصْبِرُ عَلَى لأْوَاءِ الْمَدِينَةِ وَشِدَّتِهَا أَحَدٌ مِنْ أُمَّتِي إِلاَّ كُنْتُ لَهُ شَفِيعًا يَوْمَ الْقِيَامَةِ أَوْ شَهِيدًا ‏"‏ ‏.‏
Abu Huraira (Allah be pleased with him) reported the Messenger of Allah (ﷺ) as saying:For one among my Ummah who shows endurance against the hardships and rigours of Medina, I would be an intercessor or a witness on his behalf on the Day of Resurrection

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 15 · The Book of Pilgrimage

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।