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सहीह मुस्लिम

नंबर 3344

नंबर 3344किताब 15, नंबर 548अरबी नंबरिंग 1377.01
حَدَّثَنِي زُهَيْرُ بْنُ حَرْبٍ، حَدَّثَنَا عُثْمَانُ بْنُ عُمَرَ، أَخْبَرَنَا عِيسَى بْنُ حَفْصِ بْنِ عَاصِمٍ، حَدَّثَنَا نَافِعٌ، عَنِ ابْنِ عُمَرَ، قَالَ سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم يَقُولُ ‏ "‏ مَنْ صَبَرَ عَلَى لأْوَائِهَا كُنْتُ لَهُ شَفِيعًا أَوْ شَهِيدًا يَوْمَ الْقِيَامَةِ ‏"‏ ‏.‏
Ibn 'Umar (Allah be pleased with them) reported Allah's Messenger (ﷺ) as saying:He who patiently endures the hardships of it (of this city of Medina), I would be an intercessor or a withness on his behalf on the Day of Resurrection

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 15 · The Book of Pilgrimage

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।