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सहीह मुस्लिम

नंबर 3317

नंबर 3317किताब 15, नंबर 521अरबी नंबरिंग 1362
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، وَعَمْرٌو النَّاقِدُ، كِلاَهُمَا عَنْ أَبِي أَحْمَدَ، - قَالَ أَبُو بَكْرٍ حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ الأَسْدِيُّ، - حَدَّثَنَا سُفْيَانُ، عَنْ أَبِي الزُّبَيْرِ، عَنْ جَابِرٍ، قَالَ قَالَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ إِنَّ إِبْرَاهِيمَ حَرَّمَ مَكَّةَ وَإِنِّي حَرَّمْتُ الْمَدِينَةَ مَا بَيْنَ لاَبَتَيْهَا لاَ يُقْطَعُ عِضَاهُهَا وَلاَ يُصَادُ صَيْدُهَا ‏"‏ ‏.‏
Jabir (Allah be pleased with him) reported Allah's Apostle (ﷺ) as saying:Ibrahim declared Mecca as sacred; I declare Medina, that between the two mountains, as inviolable. No tree should be lopped and no game is to be molested

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 15 · The Book of Pilgrimage

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।