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सहीह मुस्लिम

नंबर 3315

नंबर 3315किताब 15, नंबर 519अरबी नंबरिंग 1361.01
وَحَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ بْنُ سَعِيدٍ، حَدَّثَنَا بَكْرٌ، - يَعْنِي ابْنَ مُضَرَ - عَنِ ابْنِ الْهَادِ، عَنْ أَبِي، بَكْرِ بْنِ مُحَمَّدٍ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَمْرِو بْنِ عُثْمَانَ، عَنْ رَافِعِ بْنِ خَدِيجٍ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ إِنَّ إِبْرَاهِيمَ حَرَّمَ مَكَّةَ وَإِنِّي أُحَرِّمُ مَا بَيْنَ لاَبَتَيْهَا ‏"‏ ‏.‏ يُرِيدُ الْمَدِينَةَ ‏.‏
Rafi' b. Khadij reported Allah's Messenger (ﷺ) as saying:Ibrahim declared Mecca as sacred and I declare sacred the area between its two stony grounds (lava lands by which he meant Medina)

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 15 · The Book of Pilgrimage

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।