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सहीह मुस्लिम

नंबर 3312

नंबर 3312किताब 15, नंबर 516अरबी नंबरिंग 1359.02
وَحَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، وَالْحَسَنُ الْحُلْوَانِيُّ، قَالاَ حَدَّثَنَا أَبُو أُسَامَةَ، عَنْ مُسَاوِرٍ الْوَرَّاقِ، قَالَ حَدَّثَنِي وَفِي، رِوَايَةِ الْحُلْوَانِيِّ قَالَ سَمِعْتُ جَعْفَرَ بْنَ عَمْرِو بْنِ حُرَيْثٍ، عَنْ أَبِيهِ، قَالَ كَأَنِّي أَنْظُرُ إِلَى رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم عَلَى الْمِنْبَرِ وَعَلَيْهِ عِمَامَةٌ سَوْدَاءُ قَدْ أَرْخَى طَرَفَيْهَا بَيْنَ كَتِفَيْهِ ‏.‏ وَلَمْ يَقُلْ أَبُو بَكْرٍ عَلَى الْمِنْبَرِ ‏.‏
Ja'far b. 'Amr b. Huraith reported his father as saying:As if I am seeing Allah's Messenger (ﷺ) on the pulpit with a black turban on his head, and its two ends hanging between his shoulders. Abu Bakr (another narrator) did not make mention of:" Upon the pulpit

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 15 · The Book of Pilgrimage

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।