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सहीह मुस्लिम

नंबर 3309

नंबर 3309किताब 15, नंबर 513अरबी नंबरिंग 1358.01
حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ يَحْيَى التَّمِيمِيُّ، وَقُتَيْبَةُ بْنُ سَعِيدٍ الثَّقَفِيُّ، قَالَ يَحْيَى أَخْبَرَنَا وَقَالَ، قُتَيْبَةُ حَدَّثَنَا مُعَاوِيَةُ بْنُ عَمَّارٍ الدُّهْنِيُّ، عَنْ أَبِي الزُّبَيْرِ، عَنْ جَابِرِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ الأَنْصَارِيِّ، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم دَخَلَ مَكَّةَ - وَقَالَ قُتَيْبَةُ دَخَلَ يَوْمَ فَتْحِ مَكَّةَ - وَعَلَيْهِ عِمَامَةٌ سَوْدَاءُ بِغَيْرِ إِحْرَامٍ ‏.‏ وَفِي رِوَايَةِ قُتَيْبَةَ قَالَ حَدَّثَنَا أَبُو الزُّبَيْرِ عَنْ جَابِرٍ ‏.‏
Jabir b. 'Abdullah al-Ansari (Allah be pleased with them) reported that Allah's Messenger (ﷺ) entered Mecca and Qutaiba (another narrator) stated that he entered Mecca in the Year of Victory, wearing a black turban, but not wearing the Ihram

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 15 · The Book of Pilgrimage

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।