सीधे कंटेंट पर जाएँ
सहीह मुस्लिम

नंबर 3303

नंबर 3303किताब 15, नंबर 507अरबी नंबरिंग 1353.02
وَحَدَّثَنِي مُحَمَّدُ بْنُ رَافِعٍ، حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ آدَمَ، حَدَّثَنَا مُفَضَّلٌ، عَنْ مَنْصُورٍ، فِي هَذَا الإِسْنَادِ بِمِثْلِهِ وَلَمْ يَذْكُرْ ‏"‏ يَوْمَ خَلَقَ السَّمَوَاتِ وَالأَرْضَ ‏"‏ ‏.‏ وَقَالَ بَدَلَ الْقِتَالِ ‏"‏ الْقَتْلَ ‏"‏ ‏.‏ وَقَالَ ‏"‏ لاَ يَلْتَقِطُ لُقَطَتَهُ إِلاَّ مَنْ عَرَّفَهَا ‏"‏ ‏.‏
A hadith like this has been narrated on the authority of Mansur, but he did not mention:" On that very day He created the heavens and the earth," and he (the narrator) substituted the word" fighting" (qital) for" killing" (qatl), and further said:" No one is to pick up the dropped thing except one who makes a public announcement of it

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 15 · The Book of Pilgrimage

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।