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सहीह मुस्लिम

नंबर 3299

नंबर 3299किताब 15, नंबर 503अरबी नंबरिंग 1352.03
وَحَدَّثَنَا حَسَنٌ الْحُلْوَانِيُّ، وَعَبْدُ بْنُ حُمَيْدٍ، جَمِيعًا عَنْ يَعْقُوبَ بْنِ إِبْرَاهِيمَ بْنِ سَعْدٍ، حَدَّثَنَا أَبِي، عَنْ صَالِحٍ، عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ حُمَيْدٍ، أَنَّهُ سَمِعَ عُمَرَ بْنَ عَبْدِ الْعَزِيزِ، يَسْأَلُ السَّائِبَ بْنَ يَزِيدَ فَقَالَ السَّائِبُ سَمِعْتُ الْعَلاَءَ بْنَ الْحَضْرَمِيِّ، يَقُولُ سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم يَقُولُ ‏ "‏ ثَلاَثُ لَيَالٍ يَمْكُثُهُنَّ الْمُهَاجِرُ بِمَكَّةَ بَعْدَ الصَّدَرِ ‏"‏ ‏.‏
Al-'Ala' b. al-Hadrami reported Allah's Messenger (ﷺ) as saying:It is only for three nights that a Muhajir should stay at Mecca after the completion of the rituals of Hajj

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 15 · The Book of Pilgrimage

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।