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सहीह मुस्लिम

नंबर 3295

नंबर 3295किताब 15, नंबर 499अरबी नंबरिंग 1351.02
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ مِهْرَانَ الرَّازِيُّ، وَابْنُ أَبِي عُمَرَ، وَعَبْدُ بْنُ حُمَيْدٍ، جَمِيعًا عَنْ عَبْدِ، الرَّزَّاقِ - قَالَ ابْنُ مِهْرَانَ حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّزَّاقِ، - عَنْ مَعْمَرٍ، عَنِ الزُّهْرِيِّ، عَنْ عَلِيِّ بْنِ حُسَيْنٍ، عَنْ عَمْرِو بْنِ عُثْمَانَ، عَنْ أُسَامَةَ بْنِ زَيْدٍ، قُلْتُ يَا رَسُولَ اللَّهِ أَيْنَ تَنْزِلُ غَدًا وَذَلِكَ فِي حَجَّتِهِ حِينَ دَنَوْنَا مِنْ مَكَّةَ ‏.‏ فَقَالَ ‏ "‏ وَهَلْ تَرَكَ لَنَا عَقِيلٌ مَنْزِلاً ‏"‏ ‏.‏
Usama b. Zaid (Allah be pleased with him) said:Allah's Messenger, God willing, where will you stay tomorrow? And it was at the time of the Conquest (of Mecca). Thereupon he (the Holy Prophet) said: Has 'Aqil left any accommodation for us?

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 15 · The Book of Pilgrimage

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।