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सहीह मुस्लिम

नंबर 3288

नंबर 3288किताब 15, नंबर 492अरबी नंबरिंग 1348
حَدَّثَنَا هَارُونُ بْنُ سَعِيدٍ الأَيْلِيُّ، وَأَحْمَدُ بْنُ عِيسَى، قَالاَ حَدَّثَنَا ابْنُ وَهْبٍ، أَخْبَرَنِي مَخْرَمَةُ بْنُ بُكَيْرٍ، عَنْ أَبِيهِ، قَالَ سَمِعْتُ يُونُسَ بْنَ يُوسُفَ، يَقُولُ عَنِ ابْنِ الْمُسَيَّبِ، قَالَ قَالَتْ عَائِشَةُ إِنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ مَا مِنْ يَوْمٍ أَكْثَرَ مِنْ أَنْ يُعْتِقَ اللَّهُ فِيهِ عَبْدًا مِنَ النَّارِ مِنْ يَوْمِ عَرَفَةَ وَإِنَّهُ لَيَدْنُو ثُمَّ يُبَاهِي بِهِمُ الْمَلاَئِكَةَ فَيَقُولُ مَا أَرَادَ هَؤُلاَءِ ‏"‏‏.‏
A'isha (Allah be pleased with her) reported Allah's Messenger (ﷺ) as saying:There is no day when God sets free more servants from Hell than the Day of 'Arafa. He draws near, then praises them to the angels, saying: What do these want?

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 15 · The Book of Pilgrimage

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।