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सहीह मुस्लिम

नंबर 3285

नंबर 3285किताब 15, नंबर 489अरबी नंबरिंग 1346.01
وَحَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عَبَّادٍ، حَدَّثَنَا حَاتِمٌ، - وَهُوَ ابْنُ إِسْمَاعِيلَ - عَنْ مُوسَى، - وَهُوَ ابْنُ عُقْبَةَ - عَنْ سَالِمٍ، عَنْ أَبِيهِ، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم أُتِيَ فِي مُعَرَّسِهِ بِذِي الْحُلَيْفَةِ فَقِيلَ لَهُ إِنَّكَ بِبَطْحَاءَ مُبَارَكَةٍ ‏.‏
Salim (b. Abdullah b. 'Umar) reported on the authority of his father (Allah be pleased with them) that Allah's Apostle (ﷺ) was visited by (someone, i. e. an angel) during the fag end of the night at Dhu'l-Hulaifa, and it was said to him:Verily it is a blessed stony-ground

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 15 · The Book of Pilgrimage

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।