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सहीह मुस्लिम

नंबर 3202

नंबर 3202किताब 15, नंबर 406अरबी नंबरिंग 1321.09
وَحَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ يَحْيَى، وَأَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ وَأَبُو كُرَيْبٍ قَالَ يَحْيَى أَخْبَرَنَا وَقَالَ الآخَرَانِ، حَدَّثَنَا أَبُو مُعَاوِيَةَ، عَنِ الأَعْمَشِ، عَنْ إِبْرَاهِيمَ، عَنِ الأَسْوَدِ، عَنْ عَائِشَةَ، قَالَتْ رُبَّمَا فَتَلْتُ الْقَلاَئِدَ لِهَدْىِ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم فَيُقَلِّدُ هَدْيَهُ ثُمَّ يَبْعَثُ بِهِ ثُمَّ يُقِيمُ لاَ يَجْتَنِبُ شَيْئًا مِمَّا يَجْتَنِبُ الْمُحْرِمُ ‏.‏
A'isha (Allah, be pleased, with her) reported:I often wove garlands for the sacrificial animals of Allah's Messenger (ﷺ), and he garlanded his sacrificial animals, and then he sent them and stayed in the ouse) avoiding nothing which a Muhrim avoids

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 15 · The Book of Pilgrimage

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।