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सहीह मुस्लिम

नंबर 3196

नंबर 3196किताब 15, नंबर 400अरबी नंबरिंग 1321.03
وَحَدَّثَنَاهُ سَعِيدُ بْنُ مَنْصُورٍ، وَزُهَيْرُ بْنُ حَرْبٍ، قَالاَ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ، عَنِ الزُّهْرِيِّ، عَنْ عُرْوَةَ، عَنْ عَائِشَةَ، عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم ح. وَحَدَّثَنَا سَعِيدُ بْنُ مَنْصُورٍ، وَخَلَفُ بْنُ هِشَامٍ، وَقُتَيْبَةُ بْنُ سَعِيدٍ، قَالُوا أَخْبَرَنَا حَمَّادُ، بْنُ زَيْدٍ عَنْ هِشَامِ بْنِ عُرْوَةَ، عَنْ أَبِيهِ، عَنْ عَائِشَةَ، قَالَتْ كَأَنِّي أَنْظُرُ إِلَىَّ أَفْتِلُ قَلاَئِدَ هَدْىِ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم بِنَحْوِهِ ‏.‏
A'isha narrated (in another hadith narrated through another chain of transmitters) these words:"As if I am seeing myself weaving the garlands for the sacrificial animals of Allah's Messenger (ﷺ)

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 15 · The Book of Pilgrimage

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।