وَحَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ يَحْيَى، أَخْبَرَنَا أَبُو خَيْثَمَةَ، عَنْ أَبِي الزُّبَيْرِ، عَنْ جَابِرٍ، ح. وَحَدَّثَنَا أَحْمَدُ بْنُ يُونُسَ، حَدَّثَنَا زُهَيْرٌ، حَدَّثَنَا أَبُو الزُّبَيْرِ، عَنْ جَابِرٍ، قَالَ خَرَجْنَا مَعَ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم مُهِلِّينَ بِالْحَجِّ فَأَمَرَنَا رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم أَنْ نَشْتَرِكَ فِي الإِبِلِ وَالْبَقَرِ كُلُّ سَبْعَةٍ مِنَّا فِي بَدَنَةٍ .
Jabir (Allah be pleased with him) reported:We set out in the state of Ihram for Hajj along, with Allah's Messenger (ﷺ). He commanded us that seven persons should join in a camel and a cow for offering sacrifice
स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।
हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।