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सहीह मुस्लिम

नंबर 3184

नंबर 3184किताब 15, नंबर 388अरबी नंबरिंग 1317.05
وَحَدَّثَنِي مُحَمَّدُ بْنُ حَاتِمٍ، حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بَكْرٍ، أَخْبَرَنَا ابْنُ جُرَيْجٍ، أَخْبَرَنِي عَبْدُ، الْكَرِيمِ بْنُ مَالِكٍ الْجَزَرِيُّ أَنَّ مُجَاهِدًا، أَخْبَرَهُ أَنَّ عَبْدَ الرَّحْمَنِ بْنَ أَبِي لَيْلَى أَخْبَرَهُ أَنَّ عَلِيَّ بْنَ أَبِي طَالِبٍ أَخْبَرَهُ أَنَّ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم أَمَرَهُ بِمِثْلِهِ ‏.‏
A hadith like this has been narrated on the authority of Hadrat 'Ali (Allah be pleased with him)

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 15 · The Book of Pilgrimage

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।