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सहीह मुस्लिम

नंबर 3182

नंबर 3182किताब 15, नंबर 386अरबी नंबरिंग 1317.03
وَحَدَّثَنَا إِسْحَاقُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ، أَخْبَرَنَا سُفْيَانُ، وَقَالَ، إِسْحَاقُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ أَخْبَرَنَا مُعَاذُ بْنُ هِشَامٍ، قَالَ أَخْبَرَنِي أَبِي كِلاَهُمَا، عَنِ ابْنِ أَبِي نَجِيحٍ، عَنْ مُجَاهِدٍ، عَنِ ابْنِ أَبِي، لَيْلَى عَنْ عَلِيٍّ، عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم وَلَيْسَ فِي حَدِيثِهِمَا أَجْرُ الْجَازِرِ ‏.‏
This hadith has been narrated on the authority of 'Ali (Allah be pleased with him) with another chain of transmitters, but there is no mention of the wages of the butcher in it

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 15 · The Book of Pilgrimage

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।