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सहीह मुस्लिम

नंबर 3180

नंबर 3180किताब 15, नंबर 384अरबी नंबरिंग 1317.01
حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ يَحْيَى، أَخْبَرَنَا أَبُو خَيْثَمَةَ، عَنْ عَبْدِ الْكَرِيمِ، عَنْ مُجَاهِدٍ، عَنْ عَبْدِ، الرَّحْمَنِ بْنِ أَبِي لَيْلَى عَنْ عَلِيٍّ، قَالَ أَمَرَنِي رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم أَنْ أَقُومَ عَلَى بُدْنِهِ وَأَنْ أَتَصَدَّقَ بِلَحْمِهَا وَجُلُودِهَا وَأَجِلَّتِهَا وَأَنْ لاَ أُعْطِيَ الْجَزَّارَ مِنْهَا قَالَ ‏ "‏ نَحْنُ نُعْطِيهِ مِنْ عِنْدِنَا ‏"‏ ‏.‏
All (Allah be pleased with him) reperted:Allah's Messenger (ﷺ) put me in charge of his sacrificial animals, that I should give their flesh. skins and saddle cloths as sadaqa, but not to give anything to the butcher, saying: We would pay him ourselves

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 15 · The Book of Pilgrimage

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।