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सहीह मुस्लिम

नंबर 3168

नंबर 3168किताब 15, नंबर 372अरबी नंबरिंग 1310.02
حَدَّثَنِي مُحَمَّدُ بْنُ حَاتِمِ بْنِ مَيْمُونٍ، حَدَّثَنَا رَوْحُ بْنُ عُبَادَةَ، حَدَّثَنَا صَخْرُ بْنُ جُوَيْرِيَةَ، عَنْ نَافِعٍ، أَنَّ ابْنَ عُمَرَ، كَانَ يَرَى التَّحْصِيبَ سُنَّةً وَكَانَ يُصَلِّي الظُّهْرَ يَوْمَ النَّفْرِ بِالْحَصْبَةِ ‏.‏ قَالَ نَافِعٌ قَدْ حَصَّبَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم وَالْخُلَفَاءُ بَعْدَهُ ‏.‏
Nafi' reported that Ibn 'Umar regarded halt at Muhassab as Sunnah (of the Holy Prophet) and observed the noon prayer on Yaum al-Nafr at that place. Nafi' said:Allah's Messenger (ﷺ) halted at Muhassab and the Caliphs did the same after him

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 15 · The Book of Pilgrimage

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।