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सहीह मुस्लिम

नंबर 3161

नंबर 3161किताब 15, नंबर 365अरबी नंबरिंग 1306.06
وَحَدَّثَنَاهُ أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، وَزُهَيْرُ بْنُ حَرْبٍ، قَالَ أَبُو بَكْرٍ حَدَّثَنَا ابْنُ عُيَيْنَةَ، عَنِ الزُّهْرِيِّ، عَنْ عِيسَى بْنِ طَلْحَةَ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَمْرٍو، قَالَ أَتَى النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم رَجُلٌ فَقَالَ حَلَقْتُ قَبْلَ أَنْ أَذْبَحَ ‏.‏ قَالَ ‏"‏ فَاذْبَحْ وَلاَ حَرَجَ ‏"‏ ‏.‏ قَالَ ذَبَحْتُ قَبْلَ أَنْ أَرْمِيَ ‏.‏ قَالَ ‏"‏ ارْمِ وَلاَ حَرَجَ ‏"‏ ‏.‏
Adullah b. 'Amr (b. al-'As) (Allah be pleased with him) reported that a person came to Allah's Apostle (ﷺ) and said:I got (my head) shaved before sacrificing the, animal, whereupon be (the Holy Prophet) said: Sacrifice the animal (now) ; there is no harm in it. He (the person said): I sacripced the animal before throwingpebbles. whereupon he said: Throw pebbles (now) ; there is no harm in it

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 15 · The Book of Pilgrimage

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।