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सहीह मुस्लिम

नंबर 3145

नंबर 3145किताब 15, नंबर 349अरबी नंबरिंग 1301.02
وَحَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ يَحْيَى، قَالَ قَرَأْتُ عَلَى مَالِكٍ عَنْ نَافِعٍ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَ، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏"‏ اللَّهُمَّ ارْحَمِ الْمُحَلِّقِينَ ‏"‏ ‏.‏ قَالُوا وَالْمُقَصِّرِينَ يَا رَسُولَ اللَّهِ قَالَ ‏"‏ اللَّهُمَّ ارْحَمِ الْمُحَلِّقِينَ ‏"‏ ‏.‏ قَالُوا وَالْمُقَصِّرِينَ يَا رَسُولَ اللَّهِ قَالَ ‏"‏ وَالْمُقَصِّرِينَ ‏"‏ ‏.‏
Abdullah b. Umar (Allah be pleased with him) reported Allah's Messenger (ﷺ) as having observed:O Allah, have mercy upon those who get their heads shaved. They (the Companions) said: Messenger of Allah, (what about those) who have got their hair clipped? He said: O Allah, have mercy upon those who have got their heads shaved. They (again) said: Allah's Messenger, (what about those) who have got their hair clipped? Thereupon he said: (O Allah, have mercy upon those) who have got their hair clipped

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 15 · The Book of Pilgrimage

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।