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सहीह मुस्लिम

नंबर 3091

नंबर 3091किताब 15, नंबर 297अरबी नंबरिंग 1283.01
وَحَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، حَدَّثَنَا أَبُو الأَحْوَصِ، عَنْ حُصَيْنٍ، عَنْ كَثِيرِ بْنِ مُدْرِكٍ، عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ يَزِيدَ، قَالَ قَالَ عَبْدُ اللَّهِ وَنَحْنُ بِجَمْعٍ سَمِعْتُ الَّذِي أُنْزِلَتْ عَلَيْهِ سُورَةُ الْبَقَرَةِ يَقُولُ فِي هَذَا الْمَقَامِ ‏ "‏ لَبَّيْكَ اللَّهُمَّ لَبَّيْكَ ‏"‏ ‏.‏
Abdullah narrated to us as we had gathered (at Muzdalifa):I have heard from one upon whom Surah al-Baqara was revealed (the Holy Prophet) pronouncing Talbiya at this place

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 15 · The Book of Pilgrimage

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।