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सहीह मुस्लिम

नंबर 3053

नंबर 3053किताब 15, नंबर 259अरबी नंबरिंग 1263.01
وَحَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ مَسْلَمَةَ بْنِ قَعْنَبٍ، حَدَّثَنَا مَالِكٌ، ح وَحَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ يَحْيَى، - وَاللَّفْظُ لَهُ - قَالَ قَرَأْتُ عَلَى مَالِكٍ عَنْ جَعْفَرِ بْنِ مُحَمَّدٍ عَنْ أَبِيهِ عَنْ جَابِرِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ - رضى الله عنهما - أَنَّهُ قَالَ رَأَيْتُ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم رَمَلَ مِنَ الْحَجَرِ الأَسْوَدِ حَتَّى انْتَهَى إِلَيْهِ ثَلاَثَةَ أَطْوَافٍ ‏.‏
jabir b. Abdullah (Allah be pleased with them) reported:I saw Allah's Messenger (ﷺ) walking swiftly from the Black Stone till he completed three circuits up to it

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 15 · The Book of Pilgrimage

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।