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सहीह मुस्लिम

नंबर 3050

नंबर 3050किताब 15, नंबर 256अरबी नंबरिंग 1261.03
وَحَدَّثَنِي أَبُو الطَّاهِرِ، وَحَرْمَلَةُ بْنُ يَحْيَى، قَالَ حَرْمَلَةُ أَخْبَرَنَا ابْنُ وَهْبٍ، أَخْبَرَنِي يُونُسُ، عَنِ ابْنِ شِهَابٍ، أَنَّ سَالِمَ بْنَ عَبْدِ اللَّهِ، أَخْبَرَهُ أَنَّ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ عُمَرَ قَالَ رَأَيْتُ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم حِينَ يَقْدَمُ مَكَّةَ إِذَا اسْتَلَمَ الرُّكْنَ الأَسْوَدَ أَوَّلَ مَا يَطُوفُ حِينَ يَقْدَمُ يَخُبُّ ثَلاَثَةَ أَطْوَافٍ مِنَ السَّبْعِ ‏.‏
Abdullah b. 'Umar (Allah be pleased with them) reported:I saw that when Allah's Messenger (ﷺ) came to Mecca and kissed the Black Stone, (in the first circumambulation) he moved quickly in three circuits out of seven circuits

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 15 · The Book of Pilgrimage

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।