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सहीह मुस्लिम

नंबर 3026

नंबर 3026किताब 15, नंबर 234अरबी नंबरिंग 1250.01
حَدَّثَنِي مُحَمَّدُ بْنُ حَاتِمٍ، حَدَّثَنَا ابْنُ مَهْدِيٍّ، حَدَّثَنِي سَلِيمُ بْنُ حَيَّانَ، عَنْ مَرْوَانَ الأَصْفَرِ، عَنْ أَنَسٍ، - رضى الله عنه - أَنَّ عَلِيًّا، قَدِمَ مِنَ الْيَمَنِ فَقَالَ لَهُ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم ‏"‏ بِمَ أَهْلَلْتَ ‏"‏ ‏.‏ فَقَالَ أَهْلَلْتُ بِإِهْلاَلِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم ‏.‏ قَالَ ‏"‏ لَوْلاَ أَنَّ مَعِيَ الْهَدْىَ لأَحْلَلْتُ ‏"‏ ‏.‏
Anas (Allah be pleased with him) reported that 'Ali (Allah be pleased with him) came from the Yemen, and the Apostle (ﷺ) said:With (what intention) have you put on Ihram? He said: I have put on Ibram in accordance with the intention with which Allah's Apostle (ﷺ) has put on Ibram, whereupon he (the Holy Prophet) said: Had there not been the sacrificial animals with me, I would have put off Ihram (after performing 'Umra)

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 15 · The Book of Pilgrimage

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।