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सहीह मुस्लिम

नंबर 3017

नंबर 3017किताब 15, नंबर 225अरबी नंबरिंग 1243.02
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ الْمُثَنَّى، حَدَّثَنَا مُعَاذُ بْنُ هِشَامٍ، حَدَّثَنِي أَبِي، عَنْ قَتَادَةَ، فِي هَذَا الإِسْنَادِ ‏.‏ بِمَعْنَى حَدِيثِ شُعْبَةَ غَيْرَ أَنَّهُ قَالَ إِنَّ نَبِيَّ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم لَمَّا أَتَى ذَا الْحُلَيْفَةِ ‏.‏ وَلَمْ يَقُلْ صَلَّى بِهَا الظُّهْرَ ‏.‏
This hadith has been narrated on the authority of Qatada with the same chain of transmitters but with this variation (of words):" When Allah's Apostle (ﷺ) came to Dhu'l-Hulaifa" and he made no mention (of the fact) that he led the Zuhr prayer

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 15 · The Book of Pilgrimage

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।