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सहीह मुस्लिम

नंबर 3010

नंबर 3010किताब 15, नंबर 218अरबी नंबरिंग 1240.02
حَدَّثَنَا نَصْرُ بْنُ عَلِيٍّ الْجَهْضَمِيُّ، حَدَّثَنَا أَبِي، حَدَّثَنَا شُعْبَةُ، عَنْ أَيُّوبَ، عَنْ أَبِي الْعَالِيَةِ، الْبَرَّاءِ أَنَّهُ سَمِعَ ابْنَ عَبَّاسٍ، - رضى الله عنهما - يَقُولُ أَهَلَّ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم بِالْحَجِّ فَقَدِمَ لأَرْبَعٍ مَضَيْنَ مِنْ ذِي الْحِجَّةِ فَصَلَّى الصُّبْحَ وَقَالَ لَمَّا صَلَّى الصُّبْحَ ‏ "‏ مَنْ شَاءَ أَنْ يَجْعَلَهَا عُمْرَةً فَلْيَجْعَلْهَا عُمْرَةً ‏"‏ ‏.‏
Ibn 'Abbas (Allah be pleased with them) 'is reported to have said:The Messenger of Allah (ﷺ) put on Ihigm for Hajj. When four days of Dhu'l-Hijja were over, he led the dawn prayer, and when the prayer was complete, he said: He who wants to change it to Umra may do so

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 15 · The Book of Pilgrimage

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।