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सहीह मुस्लिम

नंबर 2988

नंबर 2988किताब 15, नंबर 196अरबी नंबरिंग 1229.05
وَحَدَّثَنَا ابْنُ أَبِي عُمَرَ، حَدَّثَنَا هِشَامُ بْنُ سُلَيْمَانَ الْمَخْزُومِيُّ، وَعَبْدُ الْمَجِيدِ، عَنِ ابْنِ جُرَيْجٍ، عَنْ نَافِعٍ، عَنِ ابْنِ عُمَرَ، قَالَ حَدَّثَتْنِي حَفْصَةُ، - رضى الله عنها - أَنَّ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم أَمَرَ أَزْوَاجَهُ أَنْ يَحْلِلْنَ عَامَ حَجَّةِ الْوَدَاعِ ‏.‏ قَالَتْ حَفْصَةُ فَقُلْتُ مَا يَمْنَعُكَ أَنْ تَحِلَّ قَالَ ‏ "‏ إِنِّي لَبَّدْتُ رَأْسِي وَقَلَّدْتُ هَدْيِي فَلاَ أَحِلُّ حَتَّى أَنْحَرَ هَدْيِي ‏"‏ ‏.‏
Hafsa (Allah be pleased with her) said that Allah's Apostle (ﷺ) commanded his wives that they should put off Ihram during the year of Hajj (at-ul-Wada'). whereupon she (Hafsa) said:What hinders you that you have not put off Ihram? Thereupon he said: I have stuck my hair and driven my sacrificial animal along with men and it is not permissible to put off Ihram (under this condition until I have sacrificed the animal)

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 15 · The Book of Pilgrimage

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।