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सहीह मुस्लिम

नंबर 2984

नंबर 2984किताब 15, नंबर 192अरबी नंबरिंग 1229.01
حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ يَحْيَى، قَالَ قَرَأْتُ عَلَى مَالِكٍ عَنْ نَافِعٍ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَ، أَنَّ حَفْصَةَ، - رضى الله عنهم - زَوْجَ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم قَالَتْ يَا رَسُولَ اللَّهِ مَا شَأْنُ النَّاسِ حَلُّوا وَلَمْ تَحْلِلْ أَنْتَ مِنْ عُمْرَتِكَ قَالَ ‏ "‏ إِنِّي لَبَّدْتُ رَأْسِي وَقَلَّدْتُ هَدْيِي فَلاَ أَحِلُّ حَتَّى أَنْحَرَ ‏"‏ ‏.‏
Hafsa (Allah be pleased with her), the wife of Allah's Apostle (ﷺ), said:Messenger of Allah. what about people who have put off Ihram whereas you have not put it off after your 'Umra? He said: I have stuck my hair and have driven my sacrificial animal, and would not, therefore, put off Ihram until I have sacrificed the animal

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 15 · The Book of Pilgrimage

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।