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सहीह मुस्लिम

नंबर 2977

नंबर 2977किताब 15, नंबर 186अरबी नंबरिंग 1226.06
وَحَدَّثَنَا إِسْحَاقُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ، حَدَّثَنَا عِيسَى بْنُ يُونُسَ، حَدَّثَنَا سَعِيدُ بْنُ أَبِي عَرُوبَةَ، عَنْ قَتَادَةَ، عَنْ مُطَرِّفِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ الشِّخِّيرِ، عَنْ عِمْرَانَ بْنِ الْحُصَيْنِ، - رضى الله عنه - قَالَ اعْلَمْ أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم جَمَعَ بَيْنَ حَجٍّ وَعُمْرَةٍ ثُمَّ لَمْ يَنْزِلْ فِيهَا كِتَابٌ وَلَمْ يَنْهَنَا عَنْهُمَا رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏.‏ قَالَ فِيهَا رَجُلٌ بِرَأْيِهِ مَا شَاءَ‏.‏
Imran b. al-Husain (Allah be pleased with him) said:Know well that Allah's Messenger (ﷺ) combined 'Hajj and 'Umra, and nothing was revealed in the Book (to abrogate it), and the Messenger of Allah (ﷺ) too did not forbid us from (combining) them. And whatever a person said was out of his personal opinion

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 15 · The Book of Pilgrimage

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।