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सहीह मुस्लिम

नंबर 2973

नंबर 2973किताब 15, नंबर 182अरबी नंबरिंग 1226.02
وَحَدَّثَنَاهُ إِسْحَاقُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ، وَمُحَمَّدُ بْنُ حَاتِمٍ، كِلاَهُمَا عَنْ وَكِيعٍ، حَدَّثَنَا سُفْيَانُ، عَنِ الْجُرَيْرِيِّ، فِي هَذَا الإِسْنَادِ وَقَالَ ابْنُ حَاتِمٍ فِي رِوَايَتِهِ ارْتَأَى رَجُلٌ بِرَأْيِهِ مَا شَاءَ ‏.‏ يَعْنِي عُمَرَ ‏.‏
This hadith been narrated on the authority of Jurairi with the same chain of transmitters, and Ibn Hatim said in his narration:" A person said according to his personal opinion, and it was Umar

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 15 · The Book of Pilgrimage

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।