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सहीह मुस्लिम

नंबर 2967

नंबर 2967किताब 15, नंबर 176अरबी नंबरिंग 1224.03
وَحَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ بْنُ سَعِيدٍ، حَدَّثَنَا جَرِيرٌ، عَنْ فُضَيْلٍ، عَنْ زُبَيْدٍ، عَنْ إِبْرَاهِيمَ التَّيْمِيِّ، عَنْ أَبِيهِ، قَالَ قَالَ أَبُو ذَرٍّ رضى الله عنه لاَ تَصْلُحُ الْمُتْعَتَانِ إِلاَّ لَنَا خَاصَّةً ‏.‏ يَعْنِي مُتْعَةَ النِّسَاءِ وَمُتْعَةَ الْحَجِّ ‏.‏
Abu Dharr (Allah be pleased with him) said:Two are the Mut'as which were not permissible but only for us, i. e. temporary marriage with women and Tamattu' in Hajj

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 15 · The Book of Pilgrimage

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।