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सहीह मुस्लिम

नंबर 2949

नंबर 2949किताब 15, नंबर 158अरबी नंबरिंग 1216.05
وَحَدَّثَنَا خَلَفُ بْنُ هِشَامٍ، وَأَبُو الرَّبِيعِ، وَقُتَيْبَةُ، جَمِيعًا عَنْ حَمَّادٍ، - قَالَ خَلَفٌ حَدَّثَنَا حَمَّادُ بْنُ زَيْدٍ، - عَنْ أَيُّوبَ، قَالَ سَمِعْتُ مُجَاهِدًا، يُحَدِّثُ عَنْ جَابِرِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ، - رضى الله عنهما - قَالَ قَدِمْنَا مَعَ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم وَنَحْنُ نَقُولُ لَبَّيْكَ بِالْحَجِّ ‏.‏ فَأَمَرَنَا رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم أَنْ نَجْعَلَهَا عُمْرَةً ‏.‏
Jabir b. 'Abdullah (Allah be pleased with them) reported:We came with the Messenger of Allah (May peace be upon him) pronouncing Talbiya for Hajj, and the Messenger of Allah (May peace be upon him) commanded us to make (our Ihram) into that of Umra

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 15 · The Book of Pilgrimage

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।