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सहीह मुस्लिम

नंबर 2942

नंबर 2942किताब 15, नंबर 151अरबी नंबरिंग 1215
وَحَدَّثَنِي مُحَمَّدُ بْنُ حَاتِمٍ، حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ سَعِيدٍ، عَنِ ابْنِ جُرَيْجٍ، ح وَحَدَّثَنَا عَبْدُ، بْنُ حُمَيْدٍ أَخْبَرَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بَكْرٍ، أَخْبَرَنَا ابْنُ جُرَيْجٍ، قَالَ أَخْبَرَنِي أَبُو الزُّبَيْرِ، أَنَّهُ سَمِعَ جَابِرَ، بْنَ عَبْدِ اللَّهِ - رضى الله عنه - يَقُولُ لَمْ يَطُفِ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم وَلاَ أَصْحَابُهُ بَيْنَ الصَّفَا وَالْمَرْوَةِ إِلاَّ طَوَافًا وَاحِدًا ‏.‏ زَادَ فِي حَدِيثِ مُحَمَّدِ بْنِ بَكْرٍ طَوَافَهُ الأَوَّلَ ‏.‏
Jabir b. Abdullah is reported to have said:Neither Allah's Apostle (ﷺ) nor his Companions (circumambulated the Ka'ba and) ran between al-Safa and al-Marwa but once (sufficing both for Hajj and 'Umra). But in the hadith transmitted by Muhammad b. Bakr there is an addition:" That is first circumambulation

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 15 · The Book of Pilgrimage

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।