सीधे कंटेंट पर जाएँ
सहीह मुस्लिम

नंबर 2915

नंबर 2915किताब 15, नंबर 124अरबी नंबरिंग 1211.06
وَحَدَّثَنَا أَبُو كُرَيْبٍ، حَدَّثَنَا ابْنُ نُمَيْرٍ، حَدَّثَنَا هِشَامٌ، عَنْ أَبِيهِ، عَنْ عَائِشَةَ، - رضى الله عنها - قَالَتْ خَرَجْنَا مُوَافِينَ مَعَ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم لِهِلاَلِ ذِي الْحِجَّةِ لاَ نَرَى إِلاَّ الْحَجَّ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ مَنْ أَحَبَّ مِنْكُمْ أَنْ يُهِلَّ بِعُمْرَةٍ فَلْيُهِلَّ بِعُمْرَةٍ ‏"‏ ‏.‏ وَسَاقَ الْحَدِيثَ بِمِثْلِ حَدِيثِ عَبْدَةَ ‏.‏
A'isha (Allah be pleased with her) said:We set out with the Messenger of Allah (ﷺ) just at the appearance of the new moon of Dhul- Hijja. We had no other intention but that of performing the Hajj, whereupon the Messenger of Allah (ﷺ) said: He who among you intends to put on Ihram for `Umra should do so for `Umra. The rest of the hadith is the same

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 15 · The Book of Pilgrimage

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।