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सहीह मुस्लिम

नंबर 2903

नंबर 2903किताब 15, नंबर 112अरबी नंबरिंग 1207.02
وَحَدَّثَنَا عَبْدُ بْنُ حُمَيْدٍ، أَخْبَرَنَا عَبْدُ الرَّزَّاقِ، أَخْبَرَنَا مَعْمَرٌ، عَنِ الزُّهْرِيِّ، عَنْ عُرْوَةَ، عَنْ عَائِشَةَ، - رضى الله عنها - قَالَتْ دَخَلَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم عَلَى ضُبَاعَةَ بِنْتِ الزُّبَيْرِ بْنِ عَبْدِ الْمُطَّلِبِ فَقَالَتْ يَا رَسُولَ اللَّهِ إِنِّي أُرِيدُ الْحَجَّ وَأَنَا شَاكِيَةٌ ‏.‏ فَقَالَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ حُجِّي وَاشْتَرِطِي أَنَّ مَحِلِّي حَيْثُ حَبَسْتَنِي ‏"‏ ‏.‏
A'isha (Allah be pleased with her) reported that Allah's Apostle (ﷺ) went (to the house of) Duba'a bint al-Zubair b. Abd al-Muttalib. She said:Messenger of Allah, I intend to perform Hajj, but I am ill. Thereupon Allah's Apostle (ﷺ) said: Enter Into the state of Ihram on condition that you would abandon it when Allah would detain you

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 15 · The Book of Pilgrimage

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।