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सहीह मुस्लिम

नंबर 2858

नंबर 2858किताब 15, नंबर 68अरबी नंबरिंग 1196.08
حَدَّثَنَا أَحْمَدُ بْنُ عَبْدَةَ الضَّبِّيُّ، حَدَّثَنَا فُضَيْلُ بْنُ سُلَيْمَانَ النُّمَيْرِيُّ، حَدَّثَنَا أَبُو حَازِمٍ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ أَبِي قَتَادَةَ، عَنْ أَبِيهِ، - رضى الله عنه - أَنَّهُمْ خَرَجُوا مَعَ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم وَهُمْ مُحْرِمُونَ وَأَبُو قَتَادَةَ مُحِلٌّ ‏.‏ وَسَاقَ الْحَدِيثَ وَفِيهِ فَقَالَ ‏ "‏ هَلْ مَعَكُمْ مِنْهُ شَىْءٌ ‏"‏ ‏.‏ قَالُوا مَعَنَا رِجْلُهُ ‏.‏ قَالَ فَأَخَذَهَا رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم فَأَكَلَهَا ‏.‏
Abdullah b. Abu Qatada reported on the authority of his father (Allah be pleased with him) that they went out with the Messenger of Allah (ﷺ) and they were Muhrim except Abu Qatada. The rest of the hadith Is the same (but with the exception of these words):" He (the Holy Prophet) said: 15 there any- thing out of it? They said: We have its leg with us. The Messenger of Allah (ﷺ) took it and ate it

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 15 · The Book of Pilgrimage

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।