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सहीह मुस्लिम

नंबर 2823

नंबर 2823किताब 15, नंबर 33अरबी नंबरिंग 1188
وَحَدَّثَنِي حَرْمَلَةُ بْنُ يَحْيَى، وَأَحْمَدُ بْنُ عِيسَى، قَالَ أَحْمَدُ حَدَّثَنَا وَقَالَ، حَرْمَلَةُ أَخْبَرَنَا ابْنُ وَهْبٍ، أَخْبَرَنِي يُونُسُ، عَنِ ابْنِ شِهَابٍ، أَنَّ عُبَيْدَ اللَّهِ بْنَ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَ، أَخْبَرَهُ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَ، - رضى الله عنهما - أَنَّهُ قَالَ بَاتَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم بِذِي الْحُلَيْفَةِ مَبْدَأَهُ وَصَلَّى فِي مَسْجِدِهَا ‏.‏
Abdullah b. 'Umar (Allah be pleased with them) reported that the Messenger of Allah (ﷺ) spent the night at Dhu'l-Hulaifa while commencing (the rites of) Pilgrimage and he observed prayer in the mosque

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 15 · The Book of Pilgrimage

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।