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सहीह मुस्लिम

नंबर 2783

नंबर 2783किताब 14, नंबर 4अरबी नंबरिंग 1172.02
حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ يَحْيَى، أَخْبَرَنَا أَبُو مُعَاوِيَةَ، ح وَحَدَّثَنَا سَهْلُ بْنُ عُثْمَانَ، أَخْبَرَنَا حَفْصُ بْنُ غِيَاثٍ، جَمِيعًا عَنْ هِشَامٍ، ح وَحَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، وَأَبُو كُرَيْبٍ - وَاللَّفْظُ لَهُمَا - قَالاَ حَدَّثَنَا ابْنُ نُمَيْرٍ، عَنْ هِشَامِ بْنِ عُرْوَةَ، عَنْ أَبِيهِ، عَنْ عَائِشَةَ، - رضى الله عنها - قَالَتْ كَانَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم يَعْتَكِفُ الْعَشْرَ الأَوَاخِرَ مِنْ رَمَضَانَ ‏.‏
This hadith has been narrated by 'A'isha (Allah be pleased with her) through another chain of transmitters

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 14 · The Book of I'tikaf

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।