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सहीह मुस्लिम

नंबर 2761

नंबर 2761किताब 13, नंबर 267अरबी नंबरिंग 1165.01
وَحَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ يَحْيَى، قَالَ قَرَأْتُ عَلَى مَالِكٍ عَنْ نَافِعٍ، عَنِ ابْنِ عُمَرَ، - رضى الله عنهما - أَنَّ رِجَالاً، مِنْ أَصْحَابِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم أُرُوا لَيْلَةَ الْقَدْرِ فِي الْمَنَامِ فِي السَّبْعِ الأَوَاخِرِ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ أَرَى رُؤْيَاكُمْ قَدْ تَوَاطَأَتْ فِي السَّبْعِ الأَوَاخِرِ فَمَنْ كَانَ مُتَحَرِّيَهَا فَلْيَتَحَرَّهَا فِي السَّبْعِ الأَوَاخِرِ ‏"‏ ‏.‏
अब्दुल्लाह बिन अब्बास -रज़ियल्लाहु अनहुमा- का वर्णन है कि : अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के कुछ सहाबा को स्वप्न में दिखाई दिया कि शब-ए-क़द्र (रमज़ान की) अंतिम सात रातों में है। इसपर आपने फ़रमाया : "मैं देख रहा हूँ कि तुम सब के स्वप्न अंतिम सात रातों पर एकमत हो गए हैं। इसलिए जिसे इस रात की तलाश हो, वह अंतिम सात रातों में तलाश करे।"

तर्जुमा: HadeethEnc.comइसकी तशरीह

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

जहाँ तर्जुमा शुदा नबवी हदीसों के इनसाइक्लोपीडिया (HadeethEnc.com) में किसी रिवायत का हूबहू टेक्स्ट मौजूद है, वहाँ उसका तर्जुमा उसी रिवायत के नीचे स्रोत के नाम के साथ दिखाया गया है। दोनों को प्रोग्राम के ज़रिए, सिर्फ़ अरबी टेक्स्ट की बुनियाद पर जोड़ा गया है: इनसाइक्लोपीडिया की हदीस का पूरा टेक्स्ट, उसमें दर्ज सहाबी के नाम समेत, रिवायत का आख़िरी हिस्सा है, हर्फ़-ब-हर्फ़। इस जोड़ को किसी ने नहीं जाँचा है, और सबील के जायज़ाकारों ने तर्जुमे की जाँच नहीं की है। असल टेक्स्ट अरबी है।

किताब 13 · The Book of Fasting

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।