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सहीह मुस्लिम

नंबर 2758

नंबर 2758किताब 13, नंबर 264अरबी नंबरिंग 1164.01
حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ أَيُّوبَ، وَقُتَيْبَةُ بْنُ سَعِيدٍ، وَعَلِيُّ بْنُ حُجْرٍ، جَمِيعًا عَنْ إِسْمَاعِيلَ، - قَالَ ابْنُ أَيُّوبَ حَدَّثَنَا إِسْمَاعِيلُ بْنُ جَعْفَرٍ، - أَخْبَرَنِي سَعْدُ بْنُ سَعِيدِ بْنِ قَيْسٍ، عَنْ عُمَرَ، بْنِ ثَابِتِ بْنِ الْحَارِثِ الْخَزْرَجِيِّ عَنْ أَبِي أَيُّوبَ الأَنْصَارِيِّ، - رضى الله عنه - أَنَّهُ حَدَّثَهُ أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ مَنْ صَامَ رَمَضَانَ ثُمَّ أَتْبَعَهُ سِتًّا مِنْ شَوَّالٍ كَانَ كَصِيَامِ الدَّهْرِ ‏"‏ ‏.‏
Abu Ayyub al-Ansari (Allah be pleased with him) reported Allah's Messenger (ﷺ) as saying:He who observed the fast of Ramadan and then followed it with six (fasts) of Shawwal. it would be as if he fasted perpetually

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 13 · The Book of Fasting

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।