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सहीह मुस्लिम

नंबर 2685

नंबर 2685किताब 13, नंबर 191अरबी नंबरिंग 1145.01
حَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ بْنُ سَعِيدٍ، حَدَّثَنَا بَكْرٌ، - يَعْنِي ابْنَ مُضَرَ - عَنْ عَمْرِو بْنِ الْحَارِثِ، عَنْ بُكَيْرٍ، عَنْ يَزِيدَ، مَوْلَى سَلَمَةَ عَنْ سَلَمَةَ بْنِ الأَكْوَعِ، - رضى الله عنه - قَالَ لَمَّا نَزَلَتْ هَذِهِ الآيَةُ ‏{‏ وَعَلَى الَّذِينَ يُطِيقُونَهُ فِدْيَةٌ طَعَامُ مِسْكِينٍ‏}‏ كَانَ مَنْ أَرَادَ أَنْ يُفْطِرَ وَيَفْتَدِيَ ‏.‏ حَتَّى نَزَلَتِ الآيَةُ الَّتِي بَعْدَهَا فَنَسَخَتْهَا ‏.‏
Salama b. Akwa' (Allah be pleased with him) reported that when this verse was revealed:"And as for those who can fast (but do not) expiation is the feeding of a needy person" (ii. 183), (he who liked to observe fast did observe it) and he who felt reluctant to observe it ate and expiated till the verse was revealed which abrogated it

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 13 · The Book of Fasting

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।