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सहीह मुस्लिम

नंबर 2664

नंबर 2664किताब 13, नंबर 170अरबी नंबरिंग 1133.01
وَحَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، حَدَّثَنَا وَكِيعُ بْنُ الْجَرَّاحِ، عَنْ حَاجِبِ بْنِ عُمَرَ، عَنِ الْحَكَمِ بْنِ الأَعْرَجِ، قَالَ انْتَهَيْتُ إِلَى ابْنِ عَبَّاسٍ - رضى الله عنهما - وَهُوَ مُتَوَسِّدٌ رِدَاءَهُ فِي زَمْزَمَ فَقُلْتُ لَهُ أَخْبِرْنِي عَنْ صَوْمِ عَاشُورَاءَ ‏.‏ فَقَالَ إِذَا رَأَيْتَ هِلاَلَ الْمُحَرَّمِ فَاعْدُدْ وَأَصْبِحْ يَوْمَ التَّاسِعِ صَائِمًا ‏.‏ قُلْتُ هَكَذَا كَانَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم يَصُومُهُ قَالَ نَعَمْ ‏.‏
Hakam b. al-'Araj reported:I went to Ibn 'Abbas (Allah be Pleased with both of them) and he was reclining using his mantle as a pillow near the fountain of Zamzam. I said to him: Tell me about fasting on Ashura. He said: When you see the new moon of Muharram then count the (days) and observe fast on the 9th. I said to him: Is it how the Messenger of Allah (ﷺ) observed the fast? He said: Yes

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 13 · The Book of Fasting

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।