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सहीह मुस्लिम

नंबर 2661

नंबर 2661किताब 13, नंबर 167अरबी नंबरिंग 1131.02
وَحَدَّثَنَاهُ أَحْمَدُ بْنُ الْمُنْذِرِ، حَدَّثَنَا حَمَّادُ بْنُ أُسَامَةَ، حَدَّثَنَا أَبُو الْعُمَيْسِ، أَخْبَرَنِي قَيْسٌ، فَذَكَرَ بِهَذَا الإِسْنَادِ مِثْلَهُ وَزَادَ قَالَ أَبُو أُسَامَةَ فَحَدَّثَنِي صَدَقَةُ بْنُ أَبِي عِمْرَانَ عَنْ قَيْسِ بْنِ مُسْلِمٍ عَنْ طَارِقِ بْنِ شِهَابٍ عَنْ أَبِي مُوسَى - رضى الله عنه - قَالَ كَانَ أَهْلُ خَيْبَرَ يَصُومُونَ يَوْمَ عَاشُورَاءَ يَتَّخِذُونَهُ عِيدًا وَيُلْبِسُونَ نِسَاءَهُمْ فِيهِ حُلِيَّهُمْ وَشَارَتَهُمْ ‏.‏ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ فَصُومُوهُ أَنْتُمْ ‏"‏ ‏.‏
Abu Musa reported that the people of Khaibar (most of them were Jews) observed fast on the day of 'Ashura and they treated it as 'Id and gave their women ornaments and beautiful dresses to wear. The Messenger of Allah (ﷺ) said:You (only) observe fast on this day

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 13 · The Book of Fasting

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।