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सहीह मुस्लिम

नंबर 2652

नंबर 2652किताब 13, नंबर 158अरबी नंबरिंग 1128
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، حَدَّثَنَا عُبَيْدُ اللَّهِ بْنُ مُوسَى، أَخْبَرَنَا شَيْبَانُ، عَنْ أَشْعَثَ، بْنِ أَبِي الشَّعْثَاءِ عَنْ جَعْفَرِ بْنِ أَبِي ثَوْرٍ، عَنْ جَابِرِ بْنِ سَمُرَةَ، - رضى الله عنه - قَالَ كَانَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم يَأْمُرُنَا بِصِيَامِ يَوْمِ عَاشُورَاءَ وَيَحُثُّنَا عَلَيْهِ وَيَتَعَاهَدُنَا عِنْدَهُ فَلَمَّا فُرِضَ رَمَضَانُ لَمْ يَأْمُرْنَا وَلَمْ يَنْهَنَا وَلَمْ يَتَعَاهَدْنَا عِنْدَهُ ‏.‏
Jabir b Samura reported that the Messenger of Allah (ﷺ) commanded us to observe fast on the day of Ashura and exhorted us to do it and was particular about it But when (fasting) in Ramadan was made obligatory, he hence. forth neither commanded us nor forbade us, nor was he so particular about it

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 13 · The Book of Fasting

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।