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सहीह मुस्लिम

नंबर 2650

नंबर 2650किताब 13, नंबर 156अरबी नंबरिंग 1127.03
وَحَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، حَدَّثَنَا وَكِيعٌ، وَيَحْيَى بْنُ سَعِيدٍ الْقَطَّانُ، عَنْ سُفْيَانَ، ح وَحَدَّثَنِي مُحَمَّدُ بْنُ حَاتِمٍ، - وَاللَّفْظُ لَهُ - حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ سَعِيدٍ، حَدَّثَنَا سُفْيَانُ، حَدَّثَنِي زُبَيْدٌ الْيَامِيُّ، عَنْ عُمَارَةَ بْنِ عُمَيْرٍ، عَنْ قَيْسِ بْنِ سَكَنٍ، أَنَّ الأَشْعَثَ بْنَ قَيْسٍ، دَخَلَ عَلَى عَبْدِ اللَّهِ يَوْمَ عَاشُورَاءَ وَهُوَ يَأْكُلُ فَقَالَ يَا أَبَا مُحَمَّدٍ ادْنُ فَكُلْ ‏.‏ قَالَ إِنِّي صَائِمٌ ‏.‏ قَالَ كُنَّا نَصُومُهُ ثُمَّ تُرِكَ ‏.‏
Qais b Sakan reported that al-Ash'ath b. Qais went to 'Abdullah on the day of 'Ashura while he was eating. He said:Abu Muhammad, come near and dine. Upon this he said: I am fasting. Thereupon he said: We used to observe fast and then (this practice) was abandoned

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 13 · The Book of Fasting

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।