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सहीह मुस्लिम

नंबर 2602

नंबर 2602किताब 13, नंबर 108अरबी नंबरिंग 1112.02
وَحَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ الْمُثَنَّى، أَخْبَرَنَا عَبْدُ الْوَهَّابِ الثَّقَفِيُّ، قَالَ سَمِعْتُ يَحْيَى بْنَ سَعِيدٍ، يَقُولُ أَخْبَرَنِي عَبْدُ الرَّحْمَنِ بْنُ الْقَاسِمِ، أَنَّ مُحَمَّدَ بْنَ جَعْفَرِ بْنِ الزُّبَيْرِ، أَخْبَرَهُ أَنَّ عَبَّادَ بْنَ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ الزُّبَيْرِ حَدَّثَهُ أَنَّهُ، سَمِعَ عَائِشَةَ، - رضى الله عنها - تَقُولُ أَتَى رَجُلٌ إِلَى رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم فَذَكَرَ الْحَدِيثَ وَلَيْسَ فِي أَوَّلِ الْحَدِيثِ ‏ "‏ تَصَدَّقْ تَصَدَّقْ ‏"‏ ‏.‏ وَلاَ قَوْلُهُ نَهَارًا ‏.‏
Abbad b. Abdullah b. Zubair narrated that he heard 'A'isha (Allah be pleased with her) saying:A person came to the Messenger of Allah (ﷺ), and he then narrated the hadith. But (neither these words are found):" Give charity, give charity" (nor) his words:" during the day time

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 13 · The Book of Fasting

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।