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सहीह मुस्लिम

नंबर 2599

नंबर 2599किताब 13, नंबर 105अरबी नंबरिंग 1111.05
حَدَّثَنِي مُحَمَّدُ بْنُ رَافِعٍ، حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّزَّاقِ، أَخْبَرَنَا ابْنُ جُرَيْجٍ، حَدَّثَنِي ابْنُ شِهَابٍ، عَنْ حُمَيْدِ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ، أَنَّ أَبَا هُرَيْرَةَ، حَدَّثَهُ أَنَّ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم أَمَرَ رَجُلاً أَفْطَرَ فِي رَمَضَانَ أَنْ يُعْتِقَ رَقَبَةً أَوْ يَصُومَ شَهْرَيْنِ أَوْ يُطْعِمَ سِتِّينَ مِسْكِينًا ‏.‏
Humaid b. 'Abd al-Rahman reported that Abu Huraira had narrated to him that the Messenger of Allah (ﷺ) commanded the person (who) broke the fast in Ramadan to free a slave or observe fasts for two (consecutive) months or feed sixty poor persons

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 13 · The Book of Fasting

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।