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सहीह मुस्लिम

नंबर 2532

नंबर 2532किताब 13, नंबर 38अरबी नंबरिंग 1089.02
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، قَالَ حَدَّثَنَا مُعْتَمِرُ بْنُ سُلَيْمَانَ، عَنْ إِسْحَاقَ بْنِ سُوَيْدٍ، وَخَالِدٍ عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ أَبِي بَكْرَةَ، عَنْ أَبِي بَكْرَةَ، أَنَّ نَبِيَّ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏"‏ شَهْرَا عِيدٍ لاَ يَنْقُصَانِ ‏"‏ ‏.‏ فِي حَدِيثِ خَالِدٍ ‏"‏ شَهْرَا عِيدٍ رَمَضَانُ وَذُو الْحِجَّةِ ‏"‏ ‏.‏
Abd ar-Rahman b. Abu Bakra reported on the authority of Abu Bakra that the Messenger of Allah (ﷺ) had said:The months of 'Id are not incomplete. And in the hadith narrated by Khalid (the words are):" The months, of 'Id are Ramadan and Dhu'l-Hijja

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 13 · The Book of Fasting

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।